Sep 10, 2018

68500 शिक्षक भर्ती : जांच की आंच में झुलसेंगे कई बड़े भी !, बेसिक शिक्षा परिषद से हटे अफसर की भी भूमिका पर सवाल, भर्ती में शासन के एक अफसर ने घटवाई थी सीटों की संख्या

68500 शिक्षक भर्ती : जांच की आंच में झुलसेंगे कई बड़े भी !, बेसिक शिक्षा परिषद से हटे अफसर की भी भूमिका पर सवाल, भर्ती में शासन के एक अफसर ने घटवाई थी सीटों की संख्या

सहायक शिक्षकों की भर्ती की सीबीआई जांच की मांग अभ्यर्थियों ने उठाई है। इस सम्बंध में एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि परीक्षा में सामान्य, ओबीसी और एससी-एसटी का कट ऑफ परीक्षा परिणाम बदल दिया गया। इस कारण 41,556 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इसके अलावा कॉपियों का गलत मूल्यांकन कर फेल किया गया। कुछ अभ्यर्थियों की कॉपी भी बदल दी गईं। अखिलेश यादव ने उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। प्रतिनिधिमण्डल में शशांक पाल, पंकज द्विवेदी, तूफान सिंह, जेबा खातून, प्रिया सिंह, पूजा सिंह, राजीव कुमार, जयेन्द्र पाल और नवनीत सिंह शामिल थे।• एनबीटी ब्यूरो, लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग में चल रही सहायक शिक्षक भर्ती की जांच की आंच में बड़े भी झुलस सकते हैं। अनियमिताओं के तार परीक्षा करवाने वाली एजेंसी के चयन से लेकर, बेसिक शिक्षा परिषद और शासन तक जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि अदालत में इस भर्ती के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है।

भर्ती में पहला विवाद तब उठा था जब सीटों की संख्या 68,500 से घटाकर 41,556 कर दी गई थी। इस वजह से लिखित परीक्षा क्वालिफाई करने वाले 6127 अभ्यर्थी नौकरी की दौड़ से बाहर हो गए थे। बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप पर उनकी एंट्री हुई। सूत्रों की मानें तो विभाग में पुराने अपर मुख्य सचिव के समय ही तैनात एक अफसर की भूमिका इसके पीछे थी। उनके कहने पर ही सीटें घटाई गई थीं। इससे सरकार की किरकरी हुई और इस बहाने उठने वाले सवालों की आग से पूरी भर्ती झुलस गई।

वहीं, अब तक कार्रवाई के नाम पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी की तत्कालीन सचिव सुत्ता सिंह सस्पेंड की गई हैं। इस मामले में काउंसलिंग लेटर जारी करने, अयोग्य अभ्यर्थियों को जिला आवंटित करने और बार-बार नियमों को बदलने में बेसिक शिक्षा परिषद से हाल में हटाए गए अफसर की भी अहम भूमिका रही है। इनकी तैनाती के दौरान पहले भी हुईं भर्तियों में गड़बड़ी हुई है और गंभीर आरोप लग चुके हैं। फिलहाल, अपर मुख्य सचिव गन्ना संजय भुसरेड्डी की कमिटी के पास पूरे मामले की रिपोर्ट देने की मियाद छह दिन है। 17 सितंबर को हाई कोर्ट में इससे जुड़े मामले की अहम सुनवाई है। माना जा रहा है कि शासन इसके पहले कुछ और अफसरों की जिम्मेदारी तय कर उन पर कार्रवाई कर सकता है।

हाई कोर्ट में सुनवाई आज

भर्ती से जुड़े कुछ प्रकरणों की इलाहाबाद हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई

भी है। इसमें कॉपी दिखाए जाने का भी मामला शामिल है। अब तक दिखाई गईं कॉपियों में भारी गड़बड़ी पाई गई है। एक अभ्यर्थी को कोर्ट के आदेश के बाद भी कॉपी नहीं मिली है। सोमवार को नए तथ्यों के आलोक में हाई कोर्ट के रुख का इंतजार रहेगा। कई दूसरे अभ्यर्थी भी जांच व नियुक्ति की मांग को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी में है।

कॉपियां जलाने की शिकायतों की जांच शुरू

परीक्षा नियामक प्राधिकारी की सचिव सुत्ता सिंह को सस्पेंड किए जाने के कुछ देर बाद ही शनिवार को इलाहाबाद में परीक्षा से जुड़ी कॉपियां और अन्य अभिलेख जलाए जाने की खबरें आने लगीं। मामला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। शासन के निर्देश पर रविवार को बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह और सर्वशिक्षा अभियान के निदेशक वेदपति मिश्र इलाहाबाद पहुंच गए। वहां जिन कॉपियों को जलाए जाने के आरोप थे, उनसे जुड़े अभिलेख पलटे गए। इसकी पूरी रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। वहीं, एससीईआरटी के निदेशक संजय सिन्हा ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव का चार्ज रविवार को ही रूबी सिंह को सौंप दिया। संजय सिन्हा से गड़बड़ी के बाद चार्ज लिया गया था।

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