Sep 1, 2018

68500/ 41556 शिक्षक भर्ती: नियमों का ध्यान रखते तो न होती फजीहत: बार-बार बदले गए सहायक अध्यापक भर्ती-2018 के नियम, परिषद से 22 अगस्त को जारी हुई जिलों में आरक्षणवार पदों की संख्या


भर्तियों के संबंध में शीर्ष कोर्ट का स्पष्ट निर्देश रहा है कि ‘खेल शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जाते।’ इसके उलट सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में बार-बार नियम बदले गए। वहीं, शिक्षक चयन का जिलावार आरक्षण परीक्षा परिणाम आने के दस दिन बाद जारी किया गया। जिस भर्ती की लिखित परीक्षा में तय पदों से 26944 अभ्यर्थी कम सफल हो पाएं हो उसमें आरक्षण का मानक सफल अभ्यर्थियों को बनाया गया। इसीलिए न केवल छह हजार सफल अभ्यर्थी बाहर हुए हैं, बल्कि कुल भर्ती के सापेक्ष खाली पद बढ़कर 33840 हो गए हैं। 1परिषदीय स्कूलों की शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में सफल 41556 के आधार पर पहले जिलावार पद तय हुए और बाद में हर जिले में आवंटित पदों को आरक्षणवार बांटा गया। 22 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार जिलों में सामान्य के 20868 पद थे, जबकि इस वर्ग के सफल अभ्यर्थी महज 15772 थे। ऐसे ही ओबीसी के 11186 पदों के सापेक्ष सफल अभ्यर्थी 19168 रहे। एससी के 8702 पदों के लिए सफल 6472, वहीं एसटी के 800 पदों के लिए सफल सिर्फ 123 हुए। इस तरह से श्रेणीवार आरक्षण में सामान्य के 5096, एससी की 2209 और एसटी की 677 सीटें खाली रह जाती, जबकि ओबीसी के 7982 अभ्यर्थी तय पदों से अधिक थे। जिस वर्ग के लिए आवेदन हुआ उसी में चयन होता तो यह तस्वीर दिखती लेकिन, चयन में आरक्षित वर्ग के उच्च मेरिट वालों की गणना सामान्य में होती रही है, वह नियम इस भर्ती में भी लागू हुआ इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बाहर हुए। उसमें सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी अधिक हैं। ओबीसी के केवल चंद अभ्यर्थी चयनित नहीं हो सके हैं, जिन्होंने जिला वरीयता कम जिलों की दी थी। ओबीसी की अभी कई सीटें खाली हैं, जबकि एससी व एसटी की अधिकांश सीटें रिक्त हो रह गई हैं।

चेतावनी

इस ब्लॉग की सभी खबरें सोशल मीडिया से ली गई हैं, कृपया खबर का प्रयोग करने से पहले वैधानिक पुष्टि अवश्य कर लें| इसमें ब्लॉग एडमिन की कोई जिम्मेदारी नहीं है| पाठक ख़बरों के प्रयोग हेतु खुद जिम्मेदार होगा|