SiddharthNagar: शिक्षा विभाग में सक्रिय हैं जालसाज, यूं ही नहीं बीएसए ने लगाई सुरक्षा की गुहार,वर्ष 2013 में दर्ज हुआ 36 फर्जी शिक्षकों पर मुकदमा


सिद्धार्थनगर : भारत-नेपाल सीमा स्थित इस जिले में नटवरलालों का गिरोह डेढ़ दशक से सक्रिय है। वह फर्जी शिक्षकों के भर्ती का ठेका ले रहे हैं। वर्ष 2009 में जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान में लगी आग को भी उसी का हिस्सा माना जा रहा है। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने यूं ही नहीं जिलाधिकारी से सुरक्षा की डिमांड की है। डर है कि फर्जी शिक्षकों का गिरोह कहीं बेसिक शिक्षा विभाग में तमाम महत्वपूर्ण फाइलों को नुकसान न पहुंचा दें। हालांकि जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू के निर्देश के बाद प्रभारी निरीक्षक सदर शमशेर बहादुर सिंह ने बेसिक शिक्षा कार्यालय पर निगरानी के लिए एक सिपाही व दो होमगार्ड की ड्यूटी लगाई है।
बीएसए राम सिंह द्वारा खतरे की आशंका जाहिर करने के बाद यह सवाल शिद्दत से उठने लगा है कि आखिर ऐसा कदम उठाने की नौबत क्यों आई। फर्जी शिक्षकों पर चर्चा छिड़ी ही है तो यह बताना जरूरी है कि यहां जालसाजों का गठजोड़ नया नहीं है। पिछले 15 वर्षों से उनकी भूमिका पर सवाल उठता रहा है, पर किसी न किसी तरह उनकी फाइल दबा दी जाती है। इस बार भी आशंका यही व्यक्त की जा रही है। सूबे में 16438 शिक्षकों के भर्ती के तहत यहां भी उनके अभिलेखों की जांच चल रही है। प्रबल आशंका है कि इसमें बड़े पैमाने पर फर्जी शिक्षक शामिल हैं। सुरक्षा की मांग से जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है। गंभीरता से जांच हो तो जिले में पांच सौ से अधिक शिक्षक फर्जी निकल सकते हैं।1केस एक: 13 मार्च 2013 जिले में फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत न्यायालय के आदेश पर 2009-10 के 36 शिक्षकों के विरुद्ध विभाग ने मुकदमा दर्ज करवाया गया। यह मुकदमा सदर थाने में तत्कालीन बीएसए भूपेंद्र नरायन सिंह की तहरीर पर दर्ज किया गया। इन फर्जी शिक्षकों में ज्यादातर शिक्षक देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, मऊ, आजमगढ़, बहराइच के रहने वाले थे। उन्हें 2009 में जिले में नियुक्ति मिली थी। पूर्व में ही मुकदमे के लिए आदेश मिले थे, पर उनकी सेटिंग इतनी मजबूत थी कि इनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो पाई थी। मुकदमा दर्ज होने के बावजूद इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

केस दो: 10 मई 2013 को फर्जी शिक्षक उपेंद्र प्रसाद सिंह का मामला सामने आ गया। इस प्रकरण में एक ही नाम, वल्दियत और एक ही मार्कशीट पर जिले में एक जुलाई 2009 में कैथवलिया रामनाथ भनवापुर में पहली ज्वानिंग कराई गई। इसके बाद उसी नाम और उसी मार्कशीट से 29 सितंबर 2009 को फिर से बेलहसा खुनियांव में विभाग ने नई ज्वानिंग करा दी थी। जांच में पता चला था कि दोनों उपेंद्र प्रसाद सिंह की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट कानपुर के गांधी इंटर कालेज से बनवाई गई है। बीएससी भी दोनों ने जनता कॉलेज इटावा से किया था।
दोनों के रोल नंबर भी हाईस्कूल और बीएससी तक एक ही रहे हैं। विभाग इसे पकड़ने में नाकाम रहा। असली उपेंद्र प्रसाद सिंह आखिर कौन है? इसका खुलासा नहीं हो सका।
केस तीन: वर्ष 2009 में बांसी जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान में आग लग गई। इसमें तमाम महत्वपूर्ण फाइलें जल गई। बांसी कोतवाली पुलिस को घटना की जांच सौंपी गई थी, पर इस जांच का भी कोई नतीजा नहीं निकल सका। जांच के बाद मामला टाय-टाय फिस्स है। आज भी तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेज वहां से नहीं मिल पा रहे हैं।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget