Aug 24, 2018

68550 शिक्षक भर्ती में विशिष्ट और उर्दू बीटीसी को मिलेगी नियुक्ति: बेसिक शिक्षा परिषद 1981 की नियमावली के अनुसार होगा चयन, सचिव बोले, 50 वर्ष तक के अभ्यर्थी प्रक्रिया का बनेंगे हिस्सा


इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती 2018 की लिखित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच शुरू हो गई है। इसमें कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं हो रहा है, बल्कि मूल्यांकन के दौरान यदि किसी प्रश्न के उत्तर में भूलवश अंक नहीं दिए गए तो उसमें अभ्यर्थी को अंक जरूर मिलेंगे। इसके अलावा संबंधित उत्तर पुस्तिकाओं में दिए गए अंकों को नए सिरे से जोड़ा जाएगा। यदि मानवीय त्रुटि से अंक जोड़ने या दर्ज करने में कहीं भूल हुई है तो उसमें सुधार होगा।1बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा 27 मई को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने कराई है। इसका परिणाम आने के बाद से तमाम अभ्यर्थी प्रत्यावेदन देकर दावा कर रहे थे कि उन्हें मिले अंक काफी कम है, उत्तर कुंजी और कार्बन कॉपी के आधार पर वह उत्तीर्ण प्रतिशत से अधिक अंक पा रहे हैं। परीक्षा नियामक सचिव ने इस आरोपों का संज्ञान लेकर मूल्यांकन कार्य की जांच कराने का आदेश जारी किया है। सचिव डा. सुत्ता सिंह ने स्पष्ट किया है इसमें केवल उन्हीं अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच होगी, जिन्होंने मिले अंकों से अधिक अंक पाने का दावा किया है और इसके लिए कार्यालय में प्रत्यावेदन प्राप्त कराया है। 30 अगस्त तक नए अभ्यर्थी भी ऐसा दावा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच होने का आशय कॉपियों का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं होना है, बल्कि मूल्यांकित कॉपियों में यह देखा जाएगा कि कहीं किसी प्रश्न में अंक देना छूट तो नहीं गया है और कुल अंकों को फिर से जोड़ा जाएगा। यदि प्रश्न मूल्यांकन से छूटे हैं तो अंक जरूर मिलेंगे और जोड़ गलत है तो उसे भी दुरुस्त किया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी को सफलता प्रतिशत के तय अंक या उससे अधिक मिलते हैं तो नियमानुसार नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। सचिव ने कहा कि कॉपियों का मूल्यांकन शिक्षकों ने किया है उसमें मानवीय भूल हो सकती है लेकिन, मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है। इसके बाद भी पारदर्शिता बनाए रखने को जांच करा रहे हैं, यदि अभ्यर्थियों का दावा सही निकलता है तो उन्हें लाभ देने में संस्था को कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कुछ छिपाने की मंशा होती तो उत्तरकुंजी और कार्बन कॉपी न दी जाती।


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