Jul 25, 2018

मिटाया गया इस्लामिया विद्यालय का नाम, परिपाटी बदली, अब नहीं होंगे इस्लामिया विद्यालय

मिटाया गया इस्लामिया विद्यालय का नाम
mitaya gaya islamiya vidyalay ka naam

परिपाटी बदली, अब नहीं होंगे इस्लामिया विद्यालय


एसडीएम व खंड शिक्षा अधिकारी पुलिस बल लेकर पहुंचे विद्यालय, लिखवाया प्राथमिक विद्यालय हरैया


जागरण संवाददाता, रामपुर कारखाना, देवरिया : जिला प्रशासन की सख्ती के बाद मंगलवार को देसही देवरिया के प्राथमिक विद्यालय हरैया पर लिखे इस्लामिया शब्द को मिटा दिया गया। गांववालों के विरोध के चलते जनपद मुख्यालय से लेकर गांव तक पूरे दिन सरगर्मी का माहौल रहा।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम सदर रामकेश यादव व खंड शिक्षा अधिकारी डीएन चंद पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और विद्यालय पर लिखे इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय मिटाकर केवल प्राथमिक विद्यालय हरैया लिखवाया गया। जनपद के छह प्राथमिक विद्यालयों के शुक्रवार को खुले रहने व इस्लामिया स्कूल अंकित होने का प्रकरण सुर्खियों में है। जिलाधिकारी सुजीत कुमार के निर्देश पर सोमवार को पांच विद्यालयों से इस्लामिया शब्द मिटाकर प्राथमिक विद्यालय लिखवाया गया, जिसमें सलेमपुर का नवलपुर, भलुअनी का जैतपुरा, रामपुर कारखाना का करजहां, ईश्वरी पोखर¨भडा व शामी पट्टी शामिल है लेकिन देसही देवरिया के हरैया में स्थित प्राथमिक विद्यालय से इस्लामिया शब्द हटाने को लेकर गांव वाले विरोध कर रहे थे। इसको देखते हुए सोमवार की रात बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय हरैया गांव पहुंचे और लोगों से बातचीत की लेकिन बात नहीं बनी। डीएम ने गांववालों को जिला मुख्यालय पर बुलवाया। एडीएम वित्त एवं राजस्व सीताराम गुप्त ने मंगलवार को दोपहर में ग्राम प्रधान मो. जावेद खान, प्रधानाध्यापक जहांगीर आलम आलम व अन्य गांववालों से बातचीत की। गांववालों का कहना था कि इस्लामिया शब्द लंबे समय से प्रयोग हो रहा है। एडीएम ने ग्रामीणों की मंशा से डीएम को अवगत कराया। इसके बाद डीएम ने एसडीएम सदर रामकेश यादव को इस्लामिया प्राथमिक विद्यालय हरैया माध्यम उर्दू मिटवाकर प्राथमिक विद्यालय हरैया लिखवाने का निर्देश दिया। एसडीएम व खंड शिक्षा अधिकारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और लोगों को समझाया बुझाया। इसके बाद लोगों की रजामंदी के बाद प्राथमिक विद्यालय हरैया लिखवाया गया।

जिलाधिकारी देवरिया सुजीत कुमार ने कहा कि जनपद में छह जगहों पर इस्लामिया स्कूल लिखा गया था। पांच जगहों पर सोमवार को मिटवाया गया था। हरैया में आज इस्लामिया शब्द मिटवाकर प्राथमिक विद्यालय हरैया लिखवाया गया है।

हरैया विद्यालय पर इस्लामिया शब्द मिटाता पेंटर ’ जागरणविद्यालय पर लिखा गया प्राथमिक विद्यालय हरैया।पवन कुमार मिश्र’ देवरिया1 अब विराम की तरफ बढ़ गया है। इस्लामिया शब्द मिटाकर जनपद के सभी छह प्राथमिक विद्यालयों का नाम सही कर लिया गया। यह विद्यालय शुक्रवार को खुलेंगे और रविवार को बंद रहेंगे। इनमें उर्दू की जगह हंिदूी का प्रयोग किया जाएगा। शासन के संज्ञान में प्रकरण आने के बाद कई दशकों से चली आ रही इस परंपरा में भले ही बदलाव हो गया, लेकिन इस लापरवाही की जिम्मेदारी अबतक तय नहीं हो सकी है। जिला प्रशासन इस प्रकरण पर अब विराम लगाने के मूड है। डीएम सुजीत कुमार ने इन विद्यालयों में नए प्रधानाध्यापकों की तैनाती का निर्देश दिया है।

सलेमपुर के नवलपुर, देसही देवरिया के हरैया, रामपुर कारखाना के करजहां, शामी पट्टी व ईश्वरी पोखर¨भडा इस्लामिया प्राथमिक विद्यालयों (अब प्राथमिक विद्यालय) में शुक्रवार को अवकाश का मामला नया नहीं है। यह परिपाटी कई दशकों से चली आ रही थी। इसकी वजह साफ रही। इन विद्यालयों में अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षकों की तैनाती को वरीयता दी जाती है। वे हंिदूी की बजाय उर्दू की पढ़ाई को तरजीह देते रहे हैं।

इसके अलावा शुक्रवार को नमाज को देखते अवकाश लेने की परंपरा रही है। इसकी जगह पर रविवार को विद्यालय खोला जाता था। रामपुर कारखाना में पिछले वर्ष सितंबर में खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में विनोद कुमार त्रिपाठी की तैनाती हुई। अक्टूबर 2017 में उन्हें करजहां, शामी पट्टी व ईश्वरी पोखर¨भडा में शुक्रवार को अवकाश होने की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्कालीन बीएसए को पत्र लिखकर अवगत कराया।

उन्होंने बीएसए से मार्गदर्शन मांगा कि इन विद्यालयों में शुक्रवार को अवकाश रहता है और अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षक पत्र व्यवहार में नमाज पढ़ने जाने का जिक्र करते हैं। इस संबंध में क्या कार्रवाई की जाए, लेकिन बीएसए की तरफ से कोई जवाब नहीं आया और न ही इस परिपाटी पर रोक लग सकी। देसही देवरिया के हरैया प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक जहांगीर आलम कहते हैं कि उन्होंने 20 मई 2018 को इस विद्यालय पर कार्यभार ग्रहण किया। यहां आने पर पता चला कि उपस्थिति पंजिका, प्रवेश पंजिका व टीसी उर्दू में लिखा गया है। शुक्रवार को विद्यालय बंद रहता है। यहां ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ही नियुक्ति कराते रहे हैं। बच्चों को उर्दू में ही पढ़ाई कराई जाती है।1 यह विद्यालय 1920 से संचालित है। मजबूरी में इस परंपरा का निर्वहन करना पड़ा, लेकिन अब सबकुछ बदल गया है। वहीं सलेमपुर के नवागत खंड शिक्षा अधिकारी ज्ञानचंद्र मिश्र कहते हैं कि प्राथमिक विद्यालय शुक्रवार को बंद रहता था। उस दिन मध्याह्न भोजन नहीं बनता था। इसको लेकर हर सप्ताह नोटिस जारी होती थी।

विद्यालय की तरफ से एक ही जवाब मिलता कि मेरा विद्यालय शुक्रवार को बंद रहता है। बार-बार एक ही जवाब की जानकारी होने पर ताज्जुब हुआ। 20 जुलाई को निरीक्षण किया तो सचमुच में विद्यालय बंद मिला। जिस पर प्रधानाध्यापक से जवाब मांगा और जिला प्रशासन हरकत में आया।

कई दशकों से इस्लामिया शब्द का किया जा रहा था प्रयोग

शिकायत के बाद भी तत्कालीन बीएसए ने की थी अनदेखी

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