काश! हर शिक्षक शशि और अब्दुल हो जाए

काश! हर शिक्षक शशि और अब्दुल हो जाए
kaash! har shikshak shashi aur abdul ho jaye

पिछड़ा हुआ ग्रामीण इलाका और एक सरकारी स्कूल..। जाहिर है कि सुनकर ही मन खिन्न हो जाएगा। कल्पना यही कर पाएंगे कि कुछ बच्चे आते होंगे। एक-दो शिक्षक होंगे। मध्याह्न् भोजन बनाने-बांटने की ‘सरकारी रस्म’ होती होगी और छुट्टी। हां, 2008 से पहले गंगा तट पर बसे कटरी शंकरपुर सराय गांव के उच्च प्राथमिक स्कूल की स्थिति लगभग यही थी। मगर, उसके बाद यहां शिक्षा की कमान संभालने वाली समर्पण की दो ‘प्रतिमाएं’ क्या सरकार ने स्थापित कर दीं कि स्कूल ही नहीं, क्षेत्र में शिक्षा का वातावरण बदल गया। वर्तमान स्थिति देखकर किसी के भी मुंह से यह निकल सकता है कि काश! हर शिक्षक शशि मिश्र और अब्दुल कुद्दूस हो जाए।
कटरी शंकरपळ्र सराय के उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की संख्या हळ्ई पांच गळ्ना
कैसे करें भागीदारी

जागरण संवाददाता, कानपुर : कटरी शंकरपुर सराय के उच्च प्राथमिक विद्यालय में 2008 तक मात्र 19 बच्चे पढ़ते थे। खास बात यह कि मल्लाह बहुल क्षेत्र के गांवों में कोई भी अभिभावक बच्चियों को स्कूल नहीं भेजता था। 2008 में प्रधानाध्यापिका शशि मिश्र और कुछ माह बाद ही शिक्षक अब्दुल कुद्दूस की इस विद्यालय में तैनाती हो गई। दोनों ही यहां शिक्षा के स्तर को देखकर आहत थे और मिलकर प्रयास शुरू किए। गांव-गांव जाकर अभिभावकों को समझाया। उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया। मन लगाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो लोगों का विश्वास जागा। वर्तमान में यहां विद्यार्थियों की संख्या 117 है। इनमें शंकरपुर सराय, लोधवा खेड़ा, चैनपुरवा, देवनीपुरवा आदि गांवों के 58 छात्र और 59 छात्रएं हैं।

बदल दी स्कूल की सूरतसबसे पहले अपने मोबाइल या लैपटॉप - कंप्यूटर पर ट8उ्र38ट8ढ1्रीि.ङ्घे या खं¬1ंल्ल.ङ्घे टाइप करके क्लिक करें। वहां आपको माय सिटी माय प्राइड का लोगो दिखाई देगा। इसे क्लिक करें। उसके बाद दी गई सिटी लिस्ट में अपने शहर को चुनें जिसे आप वोट देना चाहते हो। पेज पर आपको 10 शहर दिखाई देंगे। इनके नीचे एक सेक्शन सिटीजन का है। यहां आप शहर से जुड़े खास लोगों, जिन्होंने शहर को बेहतर बनाने के लिए काम किया है। उनके बारे में जान सकते हैं। इसके नीचे पेज पर एक सेक्शन सिटी का है। यहां आप शहर के विकास और समस्याओं पर विशेषज्ञ और नागरिकों की राय / सुझाव पढ़ सकते हैं।1इसमें भाग लेने के लिए ांङ्घीङ्ग‘ अकाउंट के साथ लॉगिन करें और अपने शहर को दिए गए मानकों के अनुसार वोट दें।कटरी क्षेत्र के इस स्कूल की दशा अन्य सरकारी स्कूलों की तरह बेहद खराब थी। दोनों शिक्षकों ने अपने प्रयासों से इसे ऐसा बना दिया है, जैसे कोई निजी स्कूल हो। साथ ही यहां का वातावरण बच्चों को पर्यावरण का भी संदेश देता है। पूरे विद्यालय में घनी हरियाली है।

अपने वेतन से पढ़ा रहे बेटियां को

इनका समर्पण सिर्फ अपने स्कूल में बेहतर शिक्षा देने तक सीमित नहीं है। आठवीं तक अपने स्कूल में पढ़ाने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए गांव की बेटियों का दाखिला शहर के अच्छे स्कूलों में कराते हैं। इसके लिए शशि मिश्र और अब्दुल कुद्दूस अपने वेतन का दस-दस फीसद पैसा हर माह खर्च करते हैं। बच्चियों को स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो, इसलिए अब तक 37 गरीब छात्रओं को साइकिल भी खरीद कर दे चुके हैं।बनाना चाहते हैं देश का सबसे अच्छा स्कूल

प्रधानाध्यापिका शशि मिश्र और शिक्षक अब्दुल कुद्दूस इतने बदलाव से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इनका कहना है कि यदि हमारे पास और वित्तीय संसाधन हों तो इस स्कूल को देश का सबसे अच्छा सरकारी स्कूल बना दें।शून्य हुआ शिक्षा का ‘ड्रॉप आउट’ 1सरकार भी इसके लिए हमेशा प्रयासरत रहती है कि ड्रॉप आउट न हो। बच्चे बीच में ही पढ़ाई न छोड़ें। यह कारनामा भी शिक्षा के यह दो दूत कर चुके हैं। यह ग्रामीणों को इतना जागरूक कर चुके हैं कि कोई बच्चा बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ता। स्कूल से निकलीं 225 छात्रएं आगे की पढ़ाई कर भी रही हैं।पूर्व माध्यमिक विद्यालय कटरी शंकरपुर सराय विकास खंड कल्याणपुर में बच्चों को पढ़ाते अब्दुल कुद्दुस खान एवं शशि मिश्र

kaash! har shikshak shashi aur abdul ho jaye
July 25, 2018

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