चार साल का स्नातक-बीएड कोर्स शुरू होगा

July 24, 2018
चार साल का स्नातक-बीएड कोर्स शुरू होगा
char sal ka snatak B.ed course shuru hoga

लोस में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2017 को मिली मंजूरी

नौवीं से 12वीं कक्षा तक देश की 15 लाख कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड लगाने का अभियान भी शुरू होगा

सरकार शिक्षकों की गुणवत्ता को जड़ से सुधारने के लिए अगले सत्र से चार साल का बीए-बीएड/ बीएससी-बीएड व बीकॉम-बीएड पाठ्यक्रम आरंभ करने जा रही है। साथ ही नौवीं से 12वीं कक्षा तक देश की 15 लाख कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड लगाने का अभियान भी शुरू किया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने लोस में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2017 पर र्चचा का जवाब देते हुए यह घोषणा की। सदन में सर्वसम्मति से विधेयक को मंजूरी दे दी गई। जावड़ेकर ने कहा कि र्चचा में भाग लेने वाले सभी सदस्यों ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की गुणवत्ता को सबसे महत्वपूर्ण माना है। उन्होंने कहा जिनको कोई काम नहीं मिला, वे शिक्षक बन गए, इस परंपरा को समाप्त करने के लिए सरकार चार साल की अवधि वाला बीए-बीएड/ बीएससी-बीएड/ बीकॉम-बीएड के समग्र पाठ्यक्रम शुरू करने जा रही है। इससे 12वीं पास करने के बाद वही लोग आएंगे, जो शिक्षक बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दो साल का बीएड अभी जारी रहेगा, लेकिन पांच साल बाद इसे समाप्त कर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा का बजट 70 प्रतिशत बढ़कर एक लाख दस हजार करोड़ रपए हो गया है।

उन्होंने कहा कि पहले ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड चलाया जाता था। अब सरकार नौवीं से 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए देश की करीब 15 लाख कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड लगाने का अभियान चलाएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए देश के सभी सरकारी एवं निजी 18,600 संस्थानों से वीडियोग्राफी सहित हलफनामा मांगा है कि उनके यहां क्या ढांचागत सुविधाएं हैं और शिक्षकों की क्या स्थिति हैं। उन्होंने कहा कि पहले चरण में लगभग 8,700 और दूसरे चरण में करीब 3,700 संस्थानों से हलफनामे आ गए हैं। बाकी संस्थानों से भी मंगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 87 संस्थानों को मान्यता प्रदान की जाएगी तथा प्रत्येक प्रोफेसर को दो या तीन माह के इंडक्शन कोर्स के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में करीब 15 लाख ऐसे शिक्षक थे, जो केवल 12वीं पास थे और उनके पास कोई डिप्लोमा नहीं था। ऐसे करीब साढ़े 14 लाख अध्यापक डिप्लोमा इन एजुकेशन (डीएड) की परीक्षा में बैठे हैं। बाकी लोगों को मार्च 2019 में परीक्षा में बैठाया जाएगा। इस वर्ष 27 जुलाई को पड़ने वाली गुरु पूर्णिमा के दिन सभी छात्रों से उनके गुरु का वंदन करते हुए एक सेल्फी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का अभियान भी चलाया जाएगा ताकि समाज में शिक्षकों का सम्मान और बढ़े। उन्होंने कहा कि लर्निग आउटकम यानी पढ़ाई के प्रभाव के आकलन के लिए यह तय किया गया है।


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