बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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जनवरी 07, 2018

मनमाने तरीके से हटाए गए शिक्षकों की हुई कोर्ट में जीत

लखनऊ। निज संवाददाताबाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) संस्थान से हटाए गए शिक्षकों को कोर्ट में जीत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्ड पीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह एक माह के अन्दर इन शिक्षकों को फिर से पदस्थापित करें।

बीबीएयू के यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) संस्थान में करीब 28 संविदा शिक्षक कार्यरत थे। इसमें से एक शिक्षक की शिकायत पर सीबीआई ने परिसर में छापा मारकर संस्थान के निदेशक के सहायक को नकद धनराशि के साथ गिरफ्तार किया था। शिक्षक ने शिकायत की थी कि उनकी संविदा बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगी जा रही है।

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी 28 शिक्षकों की नौकरी समाप्त कर दी थी।सभी शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी स्थिति से अवगत कराया था। साथ ही उच्च न्यायालय में न्याय के लिए गुहार लगाई। शिक्षकों का कहना था कि विज्ञापन नियम के अनुसार पहले साल के परफॉरमेंस के आधार पर 1 साल बाद 5 साल के लिए सेवा विस्तार का प्रावधान था, लेकिन विवि प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए सभी शिक्षकों को बिना किसी नोटिस के विवि से निकाल दिया था।

शिक्षकों के अनुसार उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खण्ड पीठ ने केस नंबर 32052, कृष्णकांत कनौजिया व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के तहत सुनवाई करते हुए विवि प्रशासन को लताड़ लगाई और कार्यमुक्त शिक्षकों को एक महीने के भीतर पुनर्स्थापित करने का आदेश दिया है।

विवि को एआईसीटीई और बीबीएयू अकादमिक अध्यादेश के परिनियम, क्लॉज 17 के अनुसार 5 साल के लिए उन्हें पुनः पदस्थापित करने का सख्त निर्देश दिया है। शिक्षकों ने इसे विवि प्रशासन के खिलाफ सत्य की जीत बताया है।

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