बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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दिसंबर 10, 2017

नई दिल्ली : सिर्फ डिग्री के भरोसे नहीं बन पाएंगे प्रोफेसर

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनने के लिए चयन का आधार अब अकेले शोध या डिग्रियां ही नहीं होगी, बल्कि इसके लिए प्रशासनिक और नेतृत्व क्षमता की भी परख होगी।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय जल्द ही विश्वविद्यालय में नियुक्त होने वाली फैकल्टी के चयन में इसे अनिवार्य कर सकती है। फिलहाल मंत्रलय ने हाल ही में देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ चर्चा में यह राय साझा की है। जिसमें कुलपतियों से इस पर अमल करने की भी सलाह दी है।

मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों को यह सलाह उस समय दी है, जब मौजूदा समय में अकेले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के करीब छह हजार पद खाली पड़े है।

जिन्हें भरने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। इस बीच, मंत्रलय ने विवि से खाली पदों को जल्द से भरने के निर्देश भी दिए है। माना जा रहा है कि विवि में खाली पड़े इन पदों के चयन में इसे अजमाया भी जा सकता है।

देश भर के चुनिंदा 75 विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ लीडरशिप डेवलपमेंट इन हायर एजुकेशन विषय पर चर्चा के दौरान मंत्रलय ने सभी से विश्वस्तरीय बनने की दिशा में आगे बढ़ने की पहल की। साथ ही संस्थानों से जरूरी संसाधन जुटाने के निर्देश दिए। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय ऐसी फैकल्टी के चयन को प्राथमिकता दे, जिनमें शोध और डिग्री के साथ प्रशासनिक और नेतृत्व की क्षमता हो। इनमें उद्योग घराने और सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी भी हो सकते है।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस दौरान कुलपतियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस पर बात भी की। इस दौरान कुलपतियों ने मंत्री से सवाल-जबाव भी किया। चर्चा में हार्वर्ड सहित कई विदेशी विश्वविद्यालय में फैकल्टी के चयन में इस तरह के प्रयासों का हवाला भी दिया गया। 

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