बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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अक्तूबर 04, 2017

लखनऊ : Quality Education : महज मिड डे मील से नहीं सुधरेंगे स्कूल, शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाना महत्वूर्ण

परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मिड-डे मील, डेस व किताबें मुहैया कराने के साथ ही शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाना होगा। कोई भी विद्यालय योग्य शिक्षक से ही बेहतर बनता है। यदि इससे खामी हुई तो बाकी की सुविधाएं कोई मायने नहीं रखतीं।

शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाना महत्वूर्ण:
तमाम प्रयास के बाद भी सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था सुधर नहीं पाई है। शिक्षक विद्यालयों में देरी से हुंचने के साथ ही हाजिरी लगाकर गायब हो जाते हैं। जब विद्यालय में बच्चों को मूल चीज शिक्षा ही नहीं मिल ाए तो मिड-डे मील, डेस या किताबों का क्या औचित्य।

डेस व किताबें भी पूरी नहीं मिलती :

कई बार तो सत्र बीतने के बाद भी बच्चों को जूते, डेस व किताबें पूरी नहीं मिल ाती। नियमित ढ़ाई नहीं होने की वजह से क्लास के अनुरू बच्चे शिक्षित नहीं हो ाते। स्कूलों में बेहतर ढ़ाई को लेकर सभी को ध्यान देना होगा।

अध्यापकों का भी हो मूल्यांकन :
सरकारी विद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से समय-समय र शिक्षकों का भी मूल्यांकन जरूरी है। छात्रों की तरह शिक्षकों का भी रिोर्ट कार्ड बनना चाहिए। इससे इस बात का ता चल सकेगा कि शिक्षक बच्चों र कितना ध्यान दे रहे हैं।

देश के भविष्य से न हो खिलवाड़ :
बच्चे देश का भविष्य हैं। ऐसे में उनके साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। चाहे वह शिक्षा से जुड़ा हुआ हो या स्वास्थ्य से। शिक्षकों की लारवाही की वजह से प्राइमरी पाठशाला में बच्चे ढ़ने की बजाय इधर-उधर घूमते रहते हैं। तमाम विद्यालय भी जर्जर अवस्था में हैं।

ऐसे में बच्चे क्लास में बैठ नहीं ाते। मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे विद्यालयों में बच्चों को तमाम तरह की रेशानियों का सामना करना ड़ रहा है। इसमें सुधार के लिए सरकार को बड़े व कड़े कदम उठाने होंगे।

शुद्धता के पैमाने र भी खरे नहीं :
शुद्धता की कसौटी र भी मिड-डे मील खरे नहीं हैं। बच्चों के खाने में चूहे व छिकली मिलना आम हो गई है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य र बड़ा खतरा है। मिड-डे मील में बच्चों के न्यूट्रीशियन का ूरा ध्यान रखना होगा।

सरकार की महत्वूर्ण सुविधाएं महज खानाूर्ति बनकर न रह जाए, इस ओर भी संबंधित एजेंसियों को मिलकर ध्यान देना होगा। सरकार के प्रयास से निश्चित तौर र सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या में कुछ इजाफा हुआ है।

स्कूलों के आधारभूत जरूरतों में सुधार कर बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाया जा सकता है।सामाजिक सरोकारों, मुद्दों को लेकर बेटियों की सोच और सनों को दैनिक जागरण इबारत की शक्ल देना चाहता है। इसके लिए शुरू किया गया है एक अभियान बेटियों की डायरी’।

इसमें कक्षा 12 वीं से लेकर आगे तक की छात्रएं शामिल हो सकती हैं। लिखने-ढ़ने की आदत को मजबूती प्रदान करने के साथ बौद्धिक विकास के इस अभियान में बेटियां अने शहर में सुशिक्षित समाज, स्वस्थ समाज, लनारी सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, गरीबी उन्मूलन, जनसंख्या नियोजन, सुरक्षा, लैंगिंक समानता, सामाजिक असामनता और अन्याय जैसे मुद्दों र 600 शब्दों तक लिख सकती हैं। अभियान को लेकर राय इस मेल आइडी र भेज सकते हैं -

जयश्री मिश्र बीए तृतीय वर्ष1महिला महाविद्यालय  बीएचयू तमाम प्रयास के बाद भी बच्चों को नहीं मिल रही समळ्चित शिक्षा अध्याकों का भी बनाया जाना चाहिए रिपोर्ट कार्ड

लखनऊ : Quality Education : महज मिड डे मील से नहीं सुधरेंगे स्कूल, शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाना महत्वूर्ण Rating: 4.5 Diposkan Oleh: क्रांति भूषण आर्य

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