बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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नवंबर 22, 2016

नोटबंदी से नौनिहालों के निवाले पर संकट

अलीगढ़।
प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले ने एक ओर जहां आम जनता को परेशान कर रखा है, वहीं दूसरी ओर इसके चलते नौनिहालों के निवाले पर भी सकंट छा गया है। हो कुछ ऐसा रहा है कि जबसे बड़े नोट बंद हुए हैं, तब से फलों के वितरण में भी थोड़ी समस्या आ रही है, तो काफी जगहों पर सामान उधार में आ रहे थे।

लेकिन अब दुकानदार भी ऐसा करने से कतरा रहे हैं। जबकि लाइनों में लगकर शिक्षकों को पैसे निकालने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बेसिक शिक्षा परिषद का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवार के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर देश को एक उज्जवल भविष्य देना है। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से तमाम सुविधाएं दी जाती हैं। साल में दो ड्रेस, किताबें व मिड-डे मील का प्रावधान है।

मिड-डे मील में बच्चों को प्रतिदिन के मेन्यू के हिसाब से डिस और सप्ताह में एक दिन दूध और एक दिन फल वितरण किया जाता है। लेकिन पिछले करीब दस दिनों से मिड-डे मील की स्थिति बिगड़ सी गई है।

हो कुछ ऐसा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच सौ और एक हजार रुपये के बड़े नोट बंद कर दिए हैं। जिसके बाद से बाजार से तो सौ रुपये के नोट ऐसे गायब हो गए है कि मिलना भी मुश्किल है।

वहीं बैंकों में भी पैसे निकलवाले के लिए घंटों लाइन में लग कर मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि कई जगहों पर एनजीओ के माध्यम से मिड-डे मील बंटवाया जाता है।

वहीं दूसरी ओर जहां शिक्षक और प्रधानों के हाथ में व्यवस्था है, वहा शुरुआती दिनों में किसी तरह से थोड़े पैसों और उधार पर काम चलाया जा रहा था। लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ गई है। दुकानदारों ने भी अब उधार देना बंद कर दिया है।

अगर स्थिति ऐसी ही रही, तो हो सकता है कि किसी न किसी दिन बच्चों को मिड-डे मील मिल ही न सके।
शिक्षक अजयपाल सिंह ने बताया कि सबसे बड़ी बात यह है कि एटीएम में पैसे नहीं मिल रहे हैं।

वहीं बैंकों में भी पैसे नहीं निकल पा रहे हैं। जिन शिक्षकों को दिक्कत आ रही है, वे बेचारे घंटों लाइन में लगकर खाने-पीने के लिए पैसे जुटा रहे हैं। नोटबंदी से फर्क काफी पड़ रहा है।

प्रभारी बीएसए चन्द्रभूषण सिंह ने बताया कि नोट बंदी से सब लोग प्रभावित हैं। इसलिए प्रभाव से इन्कार नहीं किया जा सकता। लेकिन अभी परिषदीय स्कूलों की व्यवस्थाओं पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।

चूंकि यह प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली योजना है। इसलिए इसके लिए विभाग भी पूरी तरह से तैयार है।

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