बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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अगस्त 29, 2016

इस सत्र में तो चालू होने से रहे मॉडल स्कूल,अरबों खर्च के बावजूद पढ़ाई के लिए नहीं हो पा रहा स्कूल भवनों का इस्तेमाल,पीपीपी गाइड लाइंस को लेकर औद्योगिक विकास विभाग की राय का इंतजार

लखनऊ : पिछड़े विकासखंडों में अरबों रुपये खर्च कर बनाये गए मॉडल स्कूल बेकार पड़े हैं। इन स्कूलों को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल के आधार पर संचालित करने का मसला अभी तक फाइलों में ही कैद है। ऐसे में चालू शैक्षिक सत्र में मॉडल स्कूलों का संचालन अब नामुमकिन है।
मनमोहन सरकार ने शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े विकासखंडों में केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर मॉडल स्कूल संचालित करने की योजना शुरू की थी।

योजना के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2010-11 में राज्य के 148 पिछड़े विकासखंडों मे 148 मॉडल स्कूलों को मंजूरी दी थी। इसके बाद 2012-13 में 45 और विकासखंडों में मॉडल स्कूलों के निर्माण को केंद्र ने हरी झंडी दिखायी। मॉडल स्कूलों के निर्माण पर होने वाले खर्च में केंद्र और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में थी।

स्वीकृत 193 मॉडल स्कूलों में बिजनौर और उन्नाव के दो स्कूलों के लिए जमीन नहीं मिल पायी थी। बाकी बनकर तैयार हो चुके हैं। मोदी सरकार ने वर्ष 2015-16 के बजट में मॉडल स्कूल योजना से हाथ खींच लिया। यह कहते हुए कि यदि राज्य सरकार अपने खर्च पर मॉडल स्कूल संचालित करना चाहे तो कर सकती है।

केंद्र के योजना से हाथ खींच लेने पर राज्य सरकार ने मॉडल स्कूलों का संचालन पीपीपी मॉडल पर करने का फैसला किया। पीपीपी मॉडल की गाइड लाइंस बनाने के लिए अन्स्र्ट एंड यंग संस्था को कंसल्टेंट चुना गया। इस बीच सरकार ने 191 में से हर मंडल मुख्यालय के एक-एक मॉडल स्कूल को समाजवादी अभिनव विद्यालय के तौर पर संचालित करने का निर्णय किया।

सरकार की प्राथमिकता के कारण इन स्कूलों का संचालन चालू शैक्षिक सत्र में राजकीय विद्यालय के रूप में शुरू कर दिया गया है।
वहीं बाकी बचे 173 मॉडल स्कूलों को पीपीपी मॉडल पर चलाने के लिए कंसल्टेंट ने गाइडलाइंस बना दी है। न्याय विभाग ने माध्यमिक शिक्षा महकमे को गाइड लाइंस पर औद्योगिक विकास विभाग की राय लेने के लिए कहा था।

प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार के मुताबिक औद्योगिक विकास विभाग ने अब तक गाइड लाइंस पर अपनी राय नहीं दी है। इस वजह से मॉडल स्कूलों की गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में चालू शैक्षिक सत्र में मॉडल स्कूलों का संचालन नामुमकिन है।

इस सत्र में तो चालू होने से रहे मॉडल स्कूल,अरबों खर्च के बावजूद पढ़ाई के लिए नहीं हो पा रहा स्कूल भवनों का इस्तेमाल,पीपीपी गाइड लाइंस को लेकर औद्योगिक विकास विभाग की राय का इंतजार Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Agrima Singh

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