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अगस्त 14, 2016

*राष्ट्रगान या राष्ट्रीय ध्वज का अपमान न पड़े भारी, इसलिए जान लीजिये ये नियम*

राष्ट्रगान हो या राष्ट्रीय ध्वज, दोनों ही देश की अस्मिता और प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कहीं भी इनका अपमान न हो या इनके अपमान के कारण आप या आपके किसी परिचित को बेइज्जती का सामना न करना पड़े, इसके लिए जरूरी है कि राष्ट्रगान से संबंधित नियमों और अन्य जरूरी बातों को जान लिया जाए-

राष्ट्रगान के लिए ये हैं नियम

राष्ट्रगान को तोड़-मरोड़कर नहीं गाया जा सकता। न ही इसकी पैरोडी बनाई जा सकती है।

अगर कोई शख्स राष्ट्रगान गाने से रोके या किसी ग्रुप को राष्ट्रगान गाने के दौरान डिस्टर्ब करे तो उसके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट टु नेशनल ऑनर एक्ट-1971 की धारा-3 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल की कैद का प्रावधान है।

प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट टु नेशनल ऑनर एक्ट-1971 का दोबारा उल्लंघन करने का अगर कोई दोषी पाया जाए तो उसे कम-से-कम एक साल कैद की सजा का प्रावधान है।

राष्ट्रगान को लेकर सिनेमाघरों में लगी है पाबंदी

1975 से पहले, फिल्म के बाद राष्ट्रगान को गाने की परंपरा थी। लेकिन वहां पर लोगों द्वारा इसको उचित सम्मान न देने पर इस पर रोक लगा दी गयी। कुछ वर्षों बाद, फिल्मों के प्रदर्शन से पहले केरल के सरकारी सिनेमाघरों में फिर से राष्ट्रगान को बढ़ावा दिया गया। वहीं महाराष्‍ट्र में भी अब कुछ वर्षों से फिल्‍म की शुरूआत से पहले राष्‍ट्रगान बजाया जाता है।

राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियम

राष्‍ट्रगान के अलावा बहुत से लोगों को राष्‍ट्रीय ध्‍वज यानि तिरंगे से संबंधित नियमों के विषय में भी शायद ज्यादा जानकारी नहीं है, तभी राष्‍ट्रीय ध्‍वज के सम्‍मान में भी ऐसी ही गलतियां अकसर होती रहती हैं। तिरंगे के लिए क्‍या हैं नियम आइए जानते हैं-

तिरंगा फहराने के कायदे-कानून

हाईकोर्ट ने पिछले दिनों एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि रात को तिरंगा नहीं उतारे जाने को प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट टु नेशनल ऑनर एक्ट-1971 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता यानि अगर कोई रात को तिरंगा उतारकर नहीं रखता है तो वह कोई नियम नहीं तोड़ रहा है। तिरंगा फहराने को लेकर और भी कई नियम-कायदे हैं-

रखरखाव के नियम

आजादी से ठीक पहले 22 जुलाई, 1947 को तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया। तिरंगे के निर्माण, उसके साइज और रंग आदि तय हैं।

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के तहत झंडे को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जाना चाहिए।

उसे कभी पानी में नहीं डुबोया जाएगा और किसी भी तरह नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। यह नियम भारतीय संविधान के लिए भी लागू होता है।

कानूनी जानकार डीबी गोस्वामी ने बताया कि प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट टु नेशनल ऑनर एक्ट-1971 की धारा-2 के मुताबिक, फ्लैग और संविधान की इन्सल्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कानून हैं।

अगर कोई शख्स झंडे को किसी के आगे झुका देता हो, उसे कपड़ा बना देता हो, मूर्ति में लपेट देता हो या फिर किसी मृत व्यक्ति (शहीद हुए आर्म्ड फोर्सेज के जवानों के अलावा) के शव पर डालता हो, तो इसे तिरंगे की इन्सल्ट माना जाएगा।

तिरंगे की यूनिफॉर्म बनाकर पहन लेना भी गलत है।

अगर कोई शख्स कमर के नीचे तिरंगा बनाकर कोई कपड़ा पहनता हो तो यह भी तिरंगे का अपमान है।

तिरंगे को अंडरगार्मेंट्स, रुमाल या कुशन आदि बनाकर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

झण्‍डा फहराने के नियम

सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही तिरंगा फहराया जा सकता है।

फ्लैग कोड में संशोधन के बाद अब आम नागरिक किसी भी वक्त किसी भी दिन झंडा फहराने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन वह फ्लैग कोड का पालन करेगा।

2001 में इंडस्ट्रियलिस्ट नवीन जिंदल ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नागरिकों को आम दिनों में भी झंडा फहराने का अधिकार मिलना चाहिए। कोर्ट ने नवीन के पक्ष में ऑर्डर दिया और सरकार से कहा कि वह इस मामले को देखे। केंद्र सरकार ने 26 जनवरी 2002 को झंडा फहराने के नियमों में बदलाव किया और इस तरह हर नागरिक को किसी भी दिन झंडा फहराने की इजाजत मिल गई।

    


 ये है हमारा राष्ट्रध्वज

भारत का राष्ट्रीय ध्वज एक राष्ट्रीय प्रतीक है जिसे क्षैतिज आयताकार में बनाया गया है। इसे तीन रंगों की मदद से सजाया गया है जिसमें गहरा केसरिया (सबसे ऊपर), सफेद( बीच में) और हरा (सबसे नीचे)। सफेद रंग के बीचों-बीच एक नीले रंग का अशोक चक्र (अर्थात कानून का चक्र) बना हुआ है जिसमें 24 तीलियाँ हैं। 22 जुलाई 1947 में भारत के संविधान सभा ने एक मीटिंग में राष्ट्रीय ध्वज के वर्तमान स्वरुप को स्वीकार किया था। भारत के सत्ताधारियों द्वारा वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अधिकारिक रुप से स्वीकार किया गया था। तीन रंगों का होने के कारण इसे तिरंगा भी कहा जाता है।

ये स्वराज ध्वज पर आधारित है (अर्थात भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का ध्वज, पिंगाली वेंकैया द्वारा रुपांकित)। भारतीय ध्वज को एक खास किस्म के कपड़े से बनाया गया है जिसे ख़ादी कहते हैं (हाथ से काता हुआ जिसे महात्मा गाँधी द्वारा प्रसिद्ध किया गया)। इसके निर्माण और डिज़ाइन के लिये भारतीय स्टैन्डर्ड ब्यूरो जिम्मेदार होता है जबकि, ख़ादी विकास एवं ग्रामीण उद्योग कमीशन को इसके निर्माण का अधिकार है। 2009 में राष्ट्रीय ध्वज का अकेला निर्माण कर्ता कर्नाटक ख़ादी ग्रामोंद्योग संयुक्त संघ रहा है।

भारतीय तिरंगे का अर्थ और महत्व

तीन रंगों में होने की वजह से भारतीय ध्वज को तिरंगा भी कहते हैं। ख़ादी के कपड़ों, बीच में चक्र और तीन रंगों का इस्तेमाल कर भारतीय ध्वज को क्षितिज के समांतर दिशा में डिज़ाइन किया गया है। ब्रिटिश शासन से भारतीय स्वतंत्रता के परिणाम स्वरूप 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार किया गया था। इसकी लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात क्रमशः २:३ होता है। आजादी और राष्ट्रीयता के प्रतीक के रुप में भारतीय ध्वज को बनाया और स्वीकार किया गया। इसमें प्रयोग रंगों का भी अलग-अलग महत्व है-

केसरिया रंग

राष्ट्रीय ध्वज का सबसे ऊपरी भाग केसरिया रंग है, जो बलिदान का प्रतीक है। राष्ट्र के प्रति हिम्मत और नि:स्वार्थ भावना को दिखाता है। ये बेहद आम और हिन्दू, बौद्ध और जैन जैसे धर्मों के लिये धार्मिक महत्व का रंग है। केसरिया रंग विभिन्न धर्मों से संबंधित लोगों के अहंकार से मुक्ति और त्याग को इंगित करता है और लोगों को एकजुट बनाता है। केसरिया का अपना अलग महत्व है जो हमारे राजनीतिक नेतृत्व को याद दिलाता है कि उनकी ही तरह हमें भी किसी व्यक्तिगत लाभ की इच्छा के पूरे समर्पण के साथ राष्ट्र की भलाई के लिये काम करना चाहिये।

सफेद रंग

राष्ट्रीय ध्वज के बीच का भाग सफेद रंग से डिज़ाइन किया गया है जो राष्ट्र की शांति, शुद्धता और ईमानदारी को प्रदर्शित करता है। भारतीय दर्शन शास्त्र के मुताबिक, सफेद रंग स्वच्छता और ज्ञान को भी दर्शाता है। राष्ट्र के मार्गदर्शन के लिये सच्चाई की राह पर ये रोशनी बिखेरता है। शांति की स्थिति को कायम रखने के दौरान मुख्य राष्ट्रीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिये देश के नेतृत्व के लिये भारतीय राजनीतिक नेताओं का ये स्मरण कराता है।

हरा रंग

तिरंगे के सबसे निचले भाग में हरा रंग है जो विश्वास, उर्वरता, खुशहाली, समृद्धि और प्रगति को इंगित करता है। भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार, हरा रंग उत्सवी और दृढ़ता का रंग है जो जीवन और खुशी को दिखाता है। ये पूरे भारत की धरती पर हरियाली को दिखाता है। ये भारत के राजनीतिक नेताओं को याद दिलाता है कि उन्हें भारत की मिट्टी की बाहरी और आंतरिक दुश्मनों से सुरक्षा करनी है।

अशोक चक्र और 24 तीलियाँ

हिन्दू धर्म के अनुसार, पुराणों में 24 संख्या बहुत महत्व रखता है। अशोक चक्र को धर्म चक्र माना जाता है जो कि समय चक्र भी कहलाता है। अशोक चक्र के बीच में 24 तीलियां हैं जो पूरे दिन के 24 बहुमूल्य घंटों को दिखाता है। ये हिन्दू धर्म के 24 धर्म ऋषियों को भी प्रदर्शित करता है जो “गायत्री मंत्र” की पूरी शक्ति को रखता है (हिन्दू धर्म का सबसे शक्तिशाली मंत्र)। हिमालय के सभी 24 धर्म ऋषियों को 24 अक्षरों के अविनाशी गायत्री मंत्र के साथ प्रदर्शित किया जाता है (पहला अक्षर विश्वामित्र जी के बारे वर्णन करता है वहीं अंतिम अक्षर यज्ञवल्क्या को जिन्होंने धर्म पर शासन किया)।

24 तीलियाँ क्या प्रदर्शित करती है?

हिन्दू धर्म के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज की सभी 24 तीलियाँ जीवन को दर्शाती हैं, अर्थात धर्म जो इस प्रकार है: प्रेम, बहादुरी, धैर्य, शांति, उदारता, अच्छाई, भरोसा, सौम्यता, नि:स्वार्थ भाव, आत्म-नियंत्रण, आत्म बलिदान, सच्चाई, नेकी, न्याय, दया, आकर्षणशीलता, नम्रता, हमदर्दी, संवेदना, धार्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्य, धार्मिक समझ, भगवान का डर और भरोसा (भरोसा या उम्मीद)।

*राष्ट्रगान या राष्ट्रीय ध्वज का अपमान न पड़े भारी, इसलिए जान लीजिये ये नियम* Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Agrima Singh

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