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अक्तूबर 22, 2015

सुर्खियां बटोरने के लिए बांट रहे पेंशन : यश भारती से सम्मानितों को हर माह पचास हजार रुपये पेंशन दिए जाने का प्रदेश सरकार का फैसला पूरी तरह से राजनैतिक

इलाहाबाद। यश भारती से सम्मानित करोड़पतियों और अरबपतियों को हर माह पचास हजार रुपये पेंशन दिए जाने का प्रदेश सरकार का फैसला पूरी तरह से राजनैतिक है। नेता सिर्फ सुर्खियां बटोरना चाहते हैं, भले ही इसमें जनता के पैसे की बर्बादी हो। ऐसा तमाम साहित्यकार और रिटायर्ड अफसर मानते हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से जनता के पैसे की बर्बादी है।

बेहतर होता कि पेंशन की यह रकम किसी जरूरतमंद पर खर्च की जाती। तमाम साहित्यकार तो यश भरती सम्मान की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाते हैं। सम्मान के लिए चयन का पैमाना क्या है, यह भी स्पष्ट नहीं। उनका कहना है कि सम्मानित होने वालों की सूची में तमाम ऐसे नाम है, जिनपर विवाद है लेकिन सरकार पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, जिसको चाहा सम्मान उठाकर दे दिया और इससे भी संतोष नहीं मिला तो जनता की गाढ़ी कमाई लुटाने की तैयारी कर ली।
‘यह सही है कि मुलायम सिंह यादव लेखकों के प्रति सह्दय हैं। उन्होंने बीमारी की हालत में अदम गोंडवी की मदद की तो मुद्रा राक्षस के लिए भी मददगार रहे लेकिन मेरी समझ में यह नहीं आता कि सपा सरकार ने ऐसा निर्णय क्यों लिया। यश भरती से सम्मानित होने वालों की सूची में ऐसे नाम हैं, जो एक-डेढ़ कमरे में रहने वाले नहीं हैं। हो सकता है इसका कोई राजनैतिक मकसद हो। यूपी सरकार को इस बहाने कोई राजनैतिक लाभ मिलता दिख रहा है। बावजूद बहुत सारे दूसरे ऐसे लेखक हैं, जिन्हें पेंशन की जरूरत है। सरकार को उनके बारे में सोचना चाहिए।’ दूधनाथ सिंह, भारत भारती से सम्मानित
‘यश भारती से सम्मानित लोगों को पेंशन देना जनता के पैसे की बर्बादी और दिखावा है। जिनके पास सबकुछ है, उन्हें पेंशन की क्या जरूरत। जनता का पैसा फिजूल नहीं है। दरअसल, यह फैसला सुर्खियां बटोरने के लिए किया गया है। वैसे भी यश भारती सम्मान विवादों का पिटारा है।सम्मानित किए जाने वालों का चयन किस योग्यता के आधार पर होता है, इसके लिए कोई कमेटी बनी है या नहीं और फैसला कौन लेता है, इनमें से कुछ भी स्पष्ट नहीं।’ राजेंद्र कुमार, वरिष्ठ साहित्यकार
‘तमाम लेखक तंगहाली में दम तोड़ देते हैं और यहां यश भारती के नाम पर करोड़पतियों-अरबपतियों को हर माह 50 हजार रुपये पेंशन दिए जाने की बात हो रही है। इसमे कलमकारों की कलम खरीदने की साजिश मानें या सुर्खियां बटोरने का हथकंडा, हर तरह से जनता के पैसे की बर्बादी है। जहां तक सम्मान की विश्वसनीयता की बात है तो सूची में तमाम ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें मंच पर फूहड़ कविता या दूसरे की कविता सुनाने के लिए सम्मानित किया गया।’ यश मालवीय, वरिष्ठ कवि
‘यश भारती के लिए चयनित लोगों को सम्मान राशि भी दी जाती है। ऐसे में करोड़पतियों और अरबपतियों को दी जाने वाली पेंशन आम आदमी की मेहनत की कमाई का हिस्सा है। यह पैसा आम आदमी को ही मिलना चाहिए। सरकार को कोई अधिकार नहीं कि इस तरह से जनता के पैसे को लुटाए। वैसे भी पब्लिक मनी का उपयोग करने से पहले दस बार सोचना चाहिए कि इसका दुरुपयोग न हो, पर लगता है कि सरकार ने इस पर कोई विचार नहीं किया।’ बादल चटर्जी, इलाहाबाद के पूर्व कमिश्नर
‘सम्मान या पुरस्कार दिया जाना अच्छी बात है लेकिन ऐसे लोगों को जनता के पैसे से पेंशन दिए जाने की बात समझ में नहीं आती, जिन्हें इसकी कोई जरूरत नहीं। महंगाई से आम आदमी जूझ रहा है। सरकार नए कर्मचारियों की पेंशन खत्म कर चुकी है। सरकारी पेंशनर्स को इतनी पेंशन भी नहीं मिल रही कि महीने का राशन और इलाज का खर्च उठा सकें। बेहतर होता कि सरकार इनके बारे में सोचती। सुर्खियां बटोरने के लिए सरकार का यह फैसला ठीक नहीं है।’ आरएस वर्मा, गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष

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सुर्खियां बटोरने के लिए बांट रहे पेंशन : यश भारती से सम्मानितों को हर माह पचास हजार रुपये पेंशन दिए जाने का प्रदेश सरकार का फैसला पूरी तरह से राजनैतिक Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

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