बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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अक्तूबर 25, 2015

गलत आरक्षण से पीड़ितों के अधिकार पर होगा मंथन,

इलाहाबाद। जिला पंचायत चुनाव में यदि आरक्षण का रोटेशन गलत तरीके से लागू किया गया है तो इससे प्रभावित व्यक्ति के अधिकार क्या हैं ? क्या वह न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है, या चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव को चुनौती देने के विकल्प समाप्त हो जाते हैं। अब तक स्थापित संवैधानिक व्यवस्था और न्यायिक निर्णय के अनुसार एक बार चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

जितेंद्र कुमार गोयल सहित दर्जनों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र की खंडपीठ ने गत दिनों इसी सवाल पर विचार के लिए प्रकरण पूर्णपीठ के संदर्भित कर दिया है जिस पर सुनवाई जारी है। खंडपीठ ने ऋशि पाल सिंह बनाम राज्य की जनहित याचिका में पारित आदेश से सहमति जताने में कठिनाई व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि किसी भी प्रकार से जिला पंचायत चुनाव या उसके लिए लागू आरक्षण को चुनौती देने की स्थिति बनती है तो व्यथित व्यक्ति के समक्ष अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। याचिका पर क्या निर्णय होगा यह अलग प्रश्न है, मगर यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिका पोषणीय नहीं है क्योंकि चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है।

खंडपीठ ने प्रश्न उठाए हैं कि चुनाव कानून की वैधानिकता पर सवाल उठने की स्थिति में या चुनाव कानून के विपरीत शासनादेश जारी किए जाने की आदि की स्थिति में क्या हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकता है। यदि चुनाव संविधान की मंशा केअनुसार नहीं हैं या चुनाव कानूनों को मनमाने तरीके से तोड़ा मरोड़ा गया है जिससे पूरी प्रक्रिया मजाक बन जाए तो उस स्थिति में अदालत के क्या अधिकार होंगे। यह भी प्रश्न उठाया है क्या कि ऋशिपाल केस में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सही कानून का प्रतिपादन किया है। इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए मुख्य न्यायाधीश के आदेश से गठित जस्टिस दिलीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पूर्णपीठ में सुनवाई जारी है।

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गलत आरक्षण से पीड़ितों के अधिकार पर होगा मंथन, Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

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