बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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सितंबर 17, 2015

सियासी पर्यटन-आलेख अवश्य पढ़ें

कोई संस्था अगर बिहार के युवाओं को भाजपा शासित राज्यों में घुमाने ले जाती है, तो किसी को क्या आपत्ति हो
सकती है? यह काम अगर कोई गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) करती है, तब तो और भी उस संस्था के नाम और फंडिंग के उसके स्रोत के बारे में जनता को जानना चाहिए। इसमें छिपाने जैसी कौन-सी बात है? जाहिर है कि बिहार के जो युवा ट्रेन में हैं, वे भाजपा का नाम ले रहे हैं।

अगर स्वयं भाजपा या भाजपा की पितृ या मातृ संस्था आरएसएस भी कार्यकर्ताओं को किसी अन्य राज्य में प्रशिक्षण के लिए विशेष ट्रेन या चार्टर्ड विमान से ले जाती है, तब भी कोई हर्ज नहीं है। लेकिन यह दाढ़ी में तिनका क्यों है? ले जाए जा रहे युवकों को बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा है? संस्था का नाम बताने में कैसा परहेज? संस्था स्वयं खुलकर सामने क्यों नहीं आ रही है और अपने फंडिंग का स्रोत क्यों नहीं बता रही है?

संस्था की ओर से कोई जिम्मेदार व्यक्ति उस ट्रेन में क्यों नहीं है, जो संस्था का नाम बताए और अपनी स्थिति साफ करे? और अब खबर यह है कि जब बात खुल गई, तो विशेष ट्रेन की बुकिंग रद्द की जा चुकी है। मैंने सुना है कि इस तरह दबे-ढके तरीके से कश्मीर से युवकों को सीमा पार प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। दमन और मतारोपण का यह नया दौर शुरू हो रहा है राज्य में। भाजपा जीते या हारे इस चुनाव में, इस तरह के मतारोपण का दूरगामी प्रभाव होगा।
मनोज कुमार की फेसबुक वॉल से

सियासी पर्यटन-आलेख अवश्य पढ़ें Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

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