बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

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सितंबर 24, 2015

रिश्तों को सीचें विश्वास और अपनेपन से ताकि खिलखिलाते रिश्ते मुस्कुराती जिंदगी

जिंदगी का आधार होते हैं रिश्ते। अगर हमारे सारे रिश्ते खुशनुमा हों तो जिंदगी में खुशियों की बौछार अपने आप शुरू हो जाती है। कैसे अपने रिश्तों को खूबसूरत बनाएं, बता रही हैं पूनम जैन हम जहां भी हों, घर, ऑफिस, सड़क, बस या रेलगाड़ी में, रिश्तों के बिना रह नहीं सकते। हमारा शरीर ही इस तरह बना है कि हमें दूसरों के साथ रिश्ते बनाने की जरूरत होती है।

 हमारे तन को संबंधों की जरूरत है, हमारे मन और भावों को दूसरों की जरूरत है। यहां तक कि हमें खुश और स्वस्थ रहने के लिए अपने साथ भी बेहतर रिश्ता बनाना होता है। और जहां रिश्ते हैं, वहां थोड़ा-बहुत तनाव होता ही है। जीवन की खुशियों को बनाए रखने के लिए हमें उलझे हुए रिश्तों के धागों को सुलझाते रहना पड़ता है। लेकिन कई बार ये कर पाना मुश्किल हो जाता है। गलती कभी अपनी होती है, तो कभी दूसरों की। क्यों जरूरी हैं रिश्ते इन दिनों व्हाट्स एप पर एक संदेश खूब पसंद किया जा रहा है। एक महिला अपनी छत पर रखे गमलों में से कुछ कम खिले पौधों को दूसरे गमले के पास रखती है।

 पति के कारण पूछने पर वह कहती है, 'पौधों को केवल खाद, पानी और बीज की जरूरत नहीं होती। अच्छे विकास के लिए दूसरे पौधों के साथ की भी जरूरत होती है।' यही जिंदगी में भी होता है। दूसरों का साथ होना हमें खुशियां देता है, हमारा विकास करता है। वहीं कुछ नजदीकों रिश्तों में कड़वाहट का होना, हमारे जीवन की दशा और दिशा बदलकर रख देता है। हर मन की कहानी सुहानी गाजियाबाद की एक कंपनी में काम करती है।

 दो साल की एक बेटी है। बड़ा परिवार है, जाहिर है मन- मुटाव भी चलते रहते हैं। सुहानी कम सदस्यों के परिवार से आई है। शुरुआत में कुछ दिन सबके साथ रहना उसे अच्छा भी लगा, पर धीरे-धीरे उसके लिए हर किसी की जरूरत और मूड के साथ तालमेल बनाना मुश्किल होता जा रहा है। उसमें और उसके पार्टनर में अच्छी बनती है, पर अन्य सदस्यों के साथ तालमेल का अभाव लड़ाई का कारण बन जाता है। ऑफिस में सहकर्मियों से भी खास नहीं बनती। कॉलेज में पढ़ रही गीतिका को लगता है कि उसे कोई प्यार नहीं करता, न माता-पिता और न उसके दोस्त। जिस लड़के से प्यार करती है, उसे गीतिका का अपने बचपन के दोस्त से बात करना पसंद नहीं है। संगीता की शादी को 18 साल हो गए हैं। बच्चे उसकी इज्जत नहीं करते और पति के पास समय नहीं है।

 पहले नौकरी करती थी, वह भी छोड़नी पड़ी। घर में बड़ी है तो करती भी सबका है और सुनती भी है। उसे लगता है कि दिनभर में मौका ही नहीं मिलता कि वह खुलकर हंस पाए। रिलेशनशिप काउंसलर गीतांजलि कहती हैं, 'रिश्ते निवेश की तरह हैं, उनमें जितना आप निवेश करते हैं उतना ही हासिल करते हैं। सभी चाहते हैं कि उनके पास प्यार भरे सफल रिश्ते हों, पर जानते नहीं कि उन्हें कैसे हासिल करें। समय के साथ नकारात्मक भावनाओं का चक्र विकसित होता जाता है और प्यार की भावनाएं कुंठा और निराशा में बदल जाती हैं। इस चक्र को तोड़ने की पहली शर्त है खुद के साथ अच्छे संबंध बनाना। किसी रिश्ते में यदि आप खुद को और लोगों को नहीं बदल सकते, तो फिर उनके साथ अपने संबंधों, व्यवहार और अपेक्षाओं को बदलना बेहतर होता है।'

 पर्सनैलिटी इन्हेंसर रीता गंगवानी कहती हैं, 'आर्थिक कारण रिश्तों पर गहरा असर डालते हैं। जहां तक संभव हो कुछ खास रिश्तों में बहुत अधिक रुपये-पैसों का हिसाब लगाने से बचना चाहिए। एक अच्छा रिश्ता और कुछ नहीं, हजारों छोटे-छोटे प्यार और करुणा के क्षण हैं।' प्यार खोजना और प्यार देना क्या किसी को मजबूर किया जा सकता है कि वह आपको प्यार करे? गीताजंलि कहती हैं, 'दबाव व मजबूरी में बने रिश्तों की उम्र भी लंबी नहीं होती। कई बार अपेक्षाएं ही इतनी अव्यावहारिक होती हैं कि उन्हें पूरा नहीं किया जा सकता। द बोल्ड लाइफ ब्लॉग की संस्थापक मोटिवेशनल गुरु टेस मार्शल कहती हैं, रिश्ते हम खुशियां हासिल करने के लिए बनाते हैं। इस इंतजार में समय व्यर्थ न करें कि दूसरे आपको खुशियां दें। आप खुद को इसके 

लिए तैयार करें।' यूं करें रिश्तों की उलझनें कम सद्गुरु जग्गी वासुदेव, आध्यात्मिक गुरु हम किसी न किसी जरूरत को पूरा करने के लिए रिश्ता बनाते हैं और वह जरूरत पूरी नहीं होती तो रिश्ता बुरा लगने लगता है। खुद को संपूर्ण समझें और खुद को प्यार करें। किसी से मन-मुटाव होने पर कोई भी फैसला या व्यवहार करते समय अपनी अच्छी यादों के बारे में भी सोचें। यह देखें कि आप क्या भुला सकती हैं। अगर सोचती हैं कि दूसरे गलत हैं, तो खुद से पूछें कि कहीं कुछ ऐसा तो नहीं जो आपको भीतर से उदास कर रहा है।

 कई बार समस्या का समाधान खुद के भीतर ही होता है। जीवन की बड़ी तस्वीर देखें। रिश्तों को कुछ अपेक्षाओं तक सीमित न करें। दूसरों की भी सुनें। अगर किसी को बदलना चाहते हैं, तो खुद से पूछें कि आप खुद में क्या बदल सकती हैं। अगर लगता है कि जीवन से खुश नहीं हैं, तो इसका दोष संबंधों को न दें। ऐसे काम करें, जो यह एहसास कराएं कि इस दुनिया में आपकी भी जगह है। कहीं आप ही तो ऐसी नहीं टेस मार्शल कहती हैं, 'एक पल के लिए अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें, जो आपको चिंता देता है। इस व्यक्ति के बारे में तीन बातें बताएं, जो आपको पसंद नहीं है। अब खुद के भीतर झांकें और पूछें, कहां और कब आप उन जैसा ही व्यवहार कर रही थीं। आप खुद को कितना बदलेंगी?

 जब आप अपनी सोच और व्यवहार में से उन आदतों, तरीकों और मान्यताओं को दूर कर देंगी तो वह व्यक्ति भी बदल जाएगा या फिर आपके जीवन से चला जाएगा। यह बात बॉस, सहकर्मी, कर्मचारी, दोस्त, प्रेमी, पति और बच्चे सब पर लागू होती है। बॉस: अगर आप सोचती हैं कि आपके बॉस सिर्फ गलतियां  निकालते हैं और कभी आपकी प्रशंसा नहीं करते, तो एक बार खुद के भीतर देखें। कहीं आप ही तो यह नहीं मान बैठी हैं कि बॉस गलती ही निकालते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको ही उनका हर फैसला गलत लगता है या आप मान बैठी हैं कि उन्हें खुश नहीं किया जा सकता! सहकर्मी: क्यों लगता है कि आपका कोई सहकर्मी बुरा चाहता है या आपको सहयोग नहीं देता? सोचें कि आपको यह एहसास कैसे हुआ? गौर करें, जहां आप दूसरों को सहयोग नहीं देतीं।

 दोस्त: आपको लगता है कि आपकी कोई सहेली है, जो आपको हीनता का एहसास कराती है। आपका इस्तेमाल करती है। कुछ लोग ऐसे होते भी हैं, पर यह भी देखें कि जिन क्षेत्रों में आप सक्षम हैं, वहां आप दूसरों से कैसा व्यवहार करती हैं। क्या आप उन्हें हीनता का एहसास कराती हैं? पार्टनर: यदि लगता है कि पार्टनर चिड़चिड़ा व असहयोगी है, आपकी नहीं सुनता तो तुरंत किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले अतीत में जाएं। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपने अपने आसपास या बचपन में ऐसे जोड़े देखे हैं, जो एक- दूसरे का सहयोग नहीं करते? एक-दूसरे से प्रेम नहीं करते?

रिश्तों को सीचें विश्वास और अपनेपन से ताकि खिलखिलाते रिश्ते मुस्कुराती जिंदगी Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

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