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सितंबर 10, 2015

पक्षियों की प्राकृतिक सुरीली आवाज और मनुष्य की आवाज संगम का संगम कराएगा बीटबॉक्स

कोलकाता, एजेंसी, एक अमेरिकी संगीतज्ञ पश्चिमी घाट के पक्षियों की प्राकृतिक सुरीली आवाज और मनुष्य की आवाज के संगम से बीटबॉक्स संगीत तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इस अनोखे प्रयास के लिए वह बेंगलूरू निवासी पक्षी पारिस्थितिकी विद वी वी रॉबिन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। बेन मिरिन ने कहा कि यह पक्षियों के साथ संगीतमय जुगलबंदी होगी। इसके लिए मैं गाने वाले पक्षियों की आवाज रिकॉर्ड करूंगा और इसके बाद उन्हें बीटबॉक्स के साथ मिलाउंगा। वह जल्द ही पश्चिमी घाट के वन की एक सप्ताह की यात्रा आरंभ करेंगे जहां वह पक्षियों की आवाज रिकॉर्ड करने की कोशिश करेंगे।

 इस प्रकार का संगीत बनाने के लिए संगीत के साथ-साथ पक्षियों के बारे में भी समझ होने की आवश्यकता है। युवा संगीतकार ने कहा कि पक्षियों की प्रजातियों और उनकी चहचहाहट की प्रकृति समझना बहुत जरूरी है। इसे इस प्रकार से मानवीय आवाज के साथ मिलाया जाएगा कि वह पक्षियों के गीतों के साथ अच्छी तरह मिल जाए। मिरिन न्यूयॉर्क में स्थानीय पक्षियों और अपनी आवाज का इस्तेमाल करके संगीत तैयार कर रहे हैं। राष्ट्रीय जीव विज्ञान केंद्र में पश्चिमी घाट के पक्षियों पर अनुसंधान कर रहे रॉबिन ने कहा कि वे पक्षियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए फोटोग्राफ और वीडियो का इस्तेमाल करके एक कहानी कहेंगे। गीत पक्षियों से जुड़ने का महत्वपूर्ण जरिया हैं। यह संरक्षण में भी मददगार होगा। इस स्काईआइलैंड बीटबॉक्स योजना पर फोटोग्राफर प्रसेनजीत यादव भी काम रह रहे हैं।

पश्चिमी घाट में पक्षियों की करीब 500 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ गीत गाने वाले और दुर्लभ एवं स्थानीय पक्षी हैं। आम तौर पर पक्षी सरल आवाजें निकाल सकते हैं लेकिन गीत गाने वाले पक्षियों की खासियत है कि वे एक विशेष कंठ का इस्तेमाल करके जटिल गीत सीख और गा सकते हैं। कई पक्षियों के गीतों में विशेष लय, उतार-चढ़ाव या स्वर होते हैं। कुछ पक्षियों की आवाज में गहराई होती हैं जबकि कुछ पक्षी अपने आवाज में उतार-चढ़ाव लाने में सक्षम होते हैं। ये पक्षी अपने गीतों और चहचहाहट का इस्तेमाल अन्य पक्षियों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए करते हैं।

वे अपनी विशिष्ट आवाजों के माध्यम से अन्य पक्षियों को छुपे हुए शिकारी की मौजूदगी के बारे में सचेत करते हैं या वे इसका इस्तेमाल अपने साथी को खोजने के लिए करते हैं। गीत गाने वाले आम पक्षियों में वॉब्र्लर, गौरैया, बैब्लर और रॉबिन शामिल हैं। रॉबिन ने कहा कि भारत में संगीत ने पक्षियों को हमेशा एक शक्तिशाली रूपक के रूप में देखा है। राग संगीत में सात में से तीन सुर पक्षियों की आवाज पर आधारित है (सा- मोर की आवाज, मा-बगुले की आवाज और पा-कोयल की आवाज)। यह योजना इसी संबंध को आगे ले जाएगी और मानवीय लय को पक्षियों की सुरीली आवाज के साथ मिलाया जाएगा।

पक्षियों की प्राकृतिक सुरीली आवाज और मनुष्य की आवाज संगम का संगम कराएगा बीटबॉक्स Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

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