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अगस्त 30, 2015

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष : वृषभ लग्न में हुआ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ।

कहते हैं भगवान श्रीराम ने माता कैकई को वचन दिया था कि,मैं तेरी कोख से द्वापर युग में जन्म लूंगा तो आपने अपना वचन निभाया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म वृषभ लग्न में हुआ। लग्न में तृतीयेश पराक्रम व भाई सखा आपका स्वामी चंद्रमा उच्च का होकर लग्न में होने से श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व शानदार उत्तम कद-काठी के, हर कला में माहिर हुए। मंगल की नीच दृष्टि से आपके सगे भाई बलरामजी ने दूसरी माता रोहिणी की कोख से जन्म लिया।पंडित विशाल दयानंद शास्त्री बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्म पत्रिका में द्वितीय वाणी, धन-कुटुंबभाव का स्वामी बुध उच्च का होकर पंचम भाव विद्या-संतान-मनोरंजन में होने से आपकी वाणी में विशेष प्रभाव होता है तभी आपकी वाणी के सशक्त प्रभाव से सभी प्रभावित थे।भागवत महापुराण के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के विषय में उल्लेख मिलता है, 'जब परम शोभायमान और सर्वगुण संपन्न घडी आई, चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में आया।

आकाश निर्मल तथा दिशाएं स्वच्छ हुई, महात्माओं के मन प्रसन्न हुए, तब भाद्रपद मॉस की कृष्णपक्ष अष्टमी कीमध्यरात्री में चतुर्भुज नारायण वासुदेव-देवकी के समक्ष बालक के रूप में प्रकट हुए। यानी भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ।इस स्कंध के अनुसार गर्गाचार्य ने इनका नामकरण संस्कारकरते हुए इनका नाम 'कृष्ण' रखा और कहा, 'इस बालक के नामाक्षर बड़े अच्छे हैं, पांच गृह उच्च क्षेत्र में हैं। मात्र राहू ही बुरे स्थान में है।गर्गाचार्य ने बताया कि जिसके सप्तम स्थान में नीच का राहू होता है, वह पुरुष कई स्त्रियों का स्वामी होता है। श्रीकृष्ण सोलह कलाओं में प्रवीन थे। इन्होने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया और महाभारत के युद्ध में पाण्डवों को विजय दिलाई।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष : वृषभ लग्न में हुआ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म । Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

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