बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत विद्यालयों के लिए वर्ष 2018 की आधिकारिक अवकाश तालिका जारी : Download Official Holiday List

अगस्त 30, 2015

पैरा शिक्षक नहीं हो सकते नियमित । जाने क्या है मामला ?

रांची।ब्यूरो प्रदेश के पारा शिक्षकों की नौकरी स्थायी नहीं होगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन का हवाला दिया गया है। इसके तहत पारा शिक्षकों को वेतनमान देने से इनकार कर देने का भी सरकार ने मन बना लिया है। सरकार का यह फैसला 26 अगस्त को पारा शिक्षकों के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली बैठक में सुना दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षा मंत्री नीरा यादव, मुख्य सचिव राजीव गौबा और शिक्षा सचिव आराधना पटनायक भी मौजूद थीं।

पारा शिक्षकों को सहूलियत देने के लिए सरकार ने मानदेय बढ़ाने की अनुशंसा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजने का फैसला किया गया। इसके तहत पारा शिक्षकों को 10 हजार रुपए न्यूनतम मानदेय देने पर मंजूरी दी जा सकती है। फिलहाल अप्रशिक्षित पारा टीचरों को 68 सौ रुपए और प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को साढ़े सात हजार से साढ़े आठ हजार रुपए तक का मानदेय मिलता है। सीएम ने सभी पारा शिक्षकों को इसी साल ट्रेनिंग दिलाने का निर्देश दिया। इससे पारा शिक्षक न्यूनतम मानदेय की जगह अधिकतम मानदेय हासिल कर सकेंगे।

इसलिए नहीं हो सकते स्थायी :-

सीएम को शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि पारा शिक्षकों को मानदेय केंद्र की योजना के तहत मिलता है। इसलिए राज्य सरकार उन्हें स्थाई करने या वेतनमान देने का फैसला नहीं ले सकती है। अगर केंद्र सरकार ने यह योजना बंद कर दी तो इनका पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार पर पड़ जाएगा।

न्यूज़ साभार : हिंदुस्तान |

पैरा शिक्षक नहीं हो सकते नियमित । जाने क्या है मामला ? Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kamal Singh Kripal

वैधानिक चेतावनी

इस ब्लॉग/वेबसाइट की सभी खबरें व शासनादेश सोशल मीडिया से ली गई हैं । कृपया खबरों / शासनादेशों का प्रयोग करने से पहले वैधानिक पुष्टि अवश्य कर लें | इसमें ब्लॉग एडमिन की कोई जिम्मेदारी नहीं है | पाठक खबरों के प्रयोग हेतु खुद जिम्मेदार होगा | किसी भी वाद - विवाद की स्थिति में उच्च न्यायालय इलाहाबाद का अंतिम निर्णय मान्य होगा ।